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Wednesday, 19 June 2013

PREM PARIKSHA - Bankelal Comics Free Download

PREM PARIKSHA
Format: Printed
Issue No: SPCL-2523-H
Language: Hindi
Author: Tarun Kumar Wahi, Anurag Kumar S
Penciler: Sushant Panda
Inker: Sangeeta Tripathi
Colorist: Basant Panda
Pages: 48
धूर्त बांकेलाल ने इस बार महारानी स्वर्णलता को इतना भड़का दिया कि स्वर्णलता ने महाराज विक्रमसिंह को अपने प्रेम की परीक्षा देने के लिए अमरप्रेम गुफा में भेज दिया| अमरप्रेम गुफा जहां की कठिन परीक्षाओं में सेंकडो सालों से कोई सफल हो कर जीवित बाहर नहीं निकल पाया| बांकेलाल को पूर्ण विश्वाश है कि इस बार महाराज विक्रमसिंह का पत्ता जरूर कटेगा लेकिन एक छोटी सी मुसीबत भी बांकेलाल के गले पड़ गई| विक्रमसिंह अमरप्रेम गुफा में अकेला नहीं गया, बांकेलाल को अपने साथ ले कर गया| क्या विक्रमसिंह का अंत करके बांकेलाल गुफा से जीवित बाहर आ पायेगा?
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Monday, 27 May 2013

Chatrapati bankelal - Bankelal Comics Free Download




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Sunday, 26 May 2013

bankelal aur dakaru - Bankelal Comics Free Download


कंकड़ बाबा के शाप के कारण सर्पलोक से निकलकर बांकेलाल और विक्रमसिंह इस बार आ पहुंचे विचित्रलोक जहाँ की हर वस्तु थी विचित्र। विचित्र लोक में बांकेलाल की शरारत से टूट गया एक विचित्र और विशाल अंडा जिसमे से निकला शैतान डकारु जिसको लंगुरपुरी के लंगूरों ने कैद कर रखा था क्योंकि डकारु डकार जाता था उनके शबरी बाग़ में लगे फलों को। इधर लंगुरपुरी के लंगूरों ने शैतान डकारु से बचने के शबरी बाग़ के फलों की रखवाली के लिए नियुक्त किया खुराफाती बांकेलाल को। और बांकेलाल ने चल दे वहां भी अपनी खुराफात।

Free Download Link : http://www.mediafire.com/Bankelal_Aur_Dakaru

Appu Apharankarta - Bankelal Comics Free Download

Tuesday, 22 January 2013

Bansuriwala - Bankelal Raj Comics Free Download

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Ab Aayega Maja - Bankelal Raj Comics Free Download

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Friday, 14 December 2012

Bankelal Aur Dakaru - Bankelal Comics Free Download

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Tuesday, 11 September 2012

Prem Chopra - Bankelal Comics Free Download

Format: Printed
Issue No: SPCL-2517-H
Language: Hindi
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Sushant Panda
Inker: Sushant Panda
Colorist: Basant Panda
Pages: 48
विक्रम से कुश्ती में पिटने के बाद बांके ने तय किया कि वो खेलों में अन्य राजाओं द्वारा मोटे को परास्त करवा कर अपने अपमान का बदला लेगा! परंतु विक्रम सिंह ने साबित कर दिया कि वो सिर्फ महावीर ही नहीं बल्कि खेलवीर भी है! तब अचानक बांके की मदद को आया पासों का देवता पासा मामा ! और तब बांके ने तय कर लिया कि वो चौपड़ में विक्रम को हरवा कर उसका सारा राजपाट हड़प लेगा! तो क्या इस बार पूरा होगा बांके का षड्यंत्र?
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Friday, 3 August 2012

SWAPNA CHOR - Bankelal Comics Free Download

SWAPNA CHOR
Format: Printed
Issue No: SPCL-2498-H
Language: Hindi
Author: Tarun Kumar Wahi, Vishal Row M
Penciler: Sushant Panda
Inker: Sushant Panda
Colorist: Basant Panda
Pages: 48
स्वप्न चोर-2498 वो बुड्ढा अपने यंत्र से चुरा लेता था किसी के भी स्वप्न! उस शातिर ने चुरा लिया बांकेलाल का स्वप्न! अब बांकेलाल को विक्रमसिंह को मार कर राजा बनने की इच्छा नहीं रही! आज बुरी तरह तड़प रहा है बांकेलाल और बुड्ढा कर रहा है बांकेलाल को अपना काम करवाने के लिए मजबूर!
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BANKELAL DIGEST 12 - Bankelal Comics Free Download

BANKELAL DIGEST 12
Format: Printed
Issue No: DGST-0078-H
Language: Hindi
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: N/A
Colorist: N/A
Pages: 192
बांकेलाल और कोढ़ी राजा-0562 विक्रमसिंह और बांकेलाल जा फंसे देवी आम्रपाली के जाल में जो लोगों को जबरदस्ती अमरता की दवाई पिला कर अमर कर देती थी! परन्तु अमर होने का मतलब था एक अनंत बुढ़ापे को झेलना! इसलिए दोनों जान बचा के भागे और जा फंसे कोढ़ी राजा के चक्कर में जो उन दोनों को समझ रहा था डाकुओं का साथी! अब क्या करेंगे विक्रम और बांके क्योंकि इधर कुआं है उधर खाई! बांकेलाल का बदला-0571 विशालगढ़ की तरफ बढ़ते बांकेलाल का अचानक विक्रमसिंह से छूट गया पीछा! प्रसन्न बांके खुशी से नाच उठा! मगर उसके बाद एक के बाद हुई उसकी फजीहत! और अंततः उसे फिंकवा दिया गया सिंहों की घाटी में! बस फिर क्या था बांके की बोदी खड़ी हो गई और वो चल दिया अपनी बेइज्जती का बदला लेने! पर इस बार वो अकेला नहीं था! उसके साथ थी पूरी सिंहों की टोली जो उसके इशारे पर कुछ भी करने को तैयार थी! जादू की झील-0581 विशालगढ़ की तलाश में भटकते विक्रमसिंह और बांकेलाल पहुंचे एक झील के पास जहाँ बांके ने किया जी भर कर स्नान! मगर वो झील थी मगरमच्छों से भरी हुई! बस फिर क्या था बांकेलाल ने अपनी जान तो बचा ली पर विक्रमसिंह को भेज दिया उस झील में स्नान करने को! और बेचारे विक्रमसिंह को मगरमच्छ घसीट कर ले गए! विक्रमसिंह से पीछा छुड़ा कर बांके पहुंचा एक नए नगर में! जहां उसमें आ गई एक चमत्कारी शक्ति वो जिस भी धातु को छूता वो बन जाता सोना! आखिर ये हुआ कैसे? बांकेलाल की ताकत-0592 बांकेलाल की किस्मत से इस बार उसे मिल गया ताकत का वृक्ष! जिसके फलों के सेवन करके वो बन गया ताकतवर लेकिन साथ ही उसे मिल गया एक श्राप भी कि वो उपर से तो ताकतवर दिखेगा पर अंदर से पिलपिला ही रहेगा! इस श्राप से अंजान बांके को मिला भारोतोलन प्रतियोगिता में भाग लेने का आमंत्रण! मिथ्या शक्ति के मद में चूर बांके ने इस प्रतियोगिता में भाग लेना कर लिया स्वीकार! तो क्या हुआ इस प्रतियोगिता का परिणाम? बेचारा बांकेलाल-0606 बांकेलाल और विक्रमसिंह को मिला एक चमत्कारी मुखौटा! बांकेलाल ने उसे बेकार की चीज समझ कर फेंक दिया मगर विक्रमसिंह ने जैसे ही उसे धारण किया वो मुखौटा उससे चिपक गया और बदल गई विक्रमसिंह की सूरत और उसमें आ गई असीमित शक्तियां! और बांकेलाल बेचारा मुंह ताकता रह गया! फिर क्या हुआ बेचारे बांकेलाल का? बांकेलाल और विक्रमसिंह-0613 विशालगढ़ की तलाश में भटकते बांकेलाल और विक्रमसिंह जा पहुंचे बुराड़ी नगर जहां उनका हुआ भव्य स्वागत! वहां के राजा बुढऊ ने बांके या विक्रम में से किसी एक को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने की घोषणा की! राजा बुढउ के कहने पर खुद को योग्य उत्तराधिकारी साबित करने विक्रम चल पड़ा सूरमा घाटी से खजाना लेने! पर भला बांके अपने सामने विक्रम को कैसे बनने देता राजा! विक्रम को मौत के जाल में फंसा कर बांके खुद जा पहुंचा सूरमा घाटी जहां खजाने की जगह उसे मिला राक्षस ‘बे’ जो लेना चाहता था उसकी बलि! अब क्या होगा बांकेलाल का?
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Wednesday, 13 June 2012

BANKELAL DIGEST 11 - Bankelal Comics Free Download

Format: Printed
Issue No: DGST-0074-H
Language: Hindi
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: N/A
Colorist: N/A
Pages: 192
चींटा घाटी-478- विशालगढ़ की तलाश में दर-दर भटकते बांकेलाल और विक्रमसिंह जा पहुंचे टुनटुन नगर जहां से बांकेलाल को भेज दिया गया दैत्य चामुण्डा का भोजन बनने को! दूसरी तरफ उसका पीछा करता हुआ आ पहुंचा विशाल चींटा भी जिससे बांकेलाल ने पहले ही पंगा लिया था! अब इधर कुआं है और उधर खाई! कैसे बांके ने अपनी जान बचाई? बांकेलाल और बकासुर-495- बांकेलाल और विक्रमसिंह जा फंसे दैत्य कुमारी छप्पनछुरी के चंगुल में जिसे बांके ने कंकड़ मार कर जगाया था! और राक्षसों के देवता के वर के अनुसार बांके ही होने वाला था उसका वर! सो उसने बांके को जबरन उठाया और ले गई राक्षस बस्ती! दूसरी तरफ दुष्ट राक्षस बकासुर भी गदासुर नामक अमोघ अस्त्र ले कर पहुँच गया राक्षस बस्ती और रख दिया दैत्य कुमारी से विवाह का प्रस्ताव! अब बांके बनेगा दैत्य कुमारी का वर या बनेगा उसका सींक कबाब? सुनहरी मृग-502- बांकेलाल और विक्रमसिंह जा पहुंचे शक्तिनगर जहां का राजा शक्तिसिंह था बंदरकाट रोग का शिकार जिसका इलाज था सुनहरे मृग की कस्तूरी! बांकेलाल विक्रमसिंह और शक्तिसिंह को मार कर शक्तिनगर का राजा बनने का रच रहा था षड्यंत्र कि तभी भविष्य से आया डाकू भयंकरसिंह भविष्य के अस्त्र-शष्त्र ले कर आ धमका शक्तिनगर लूटपाट करने| जिस देश में बांके रहता है-514 -बांकेलाल और विक्रमसिंह जा टकराए तीन विजेता खिलाड़ी मुक्काराज, गदर्भराज, तैराकराजा से जो आये थे क्रीड़ा प्रतियोगिता में हिस्सा लेने! उन तीनों ने मिलकर बांकेलाल की बना दी दुर्गत! बस फिर क्या था बांके की बोदी खड़ी हो गई और उसने प्रण लिया कि वो इनका तिया-पांचा करके ही दम लेगा! बांकेलाल का जाल-530- बांकेलाल और विक्रमसिंह जा टकराए राक्षस प्राणभेदी से जो झील में रहने वाले महाजीवों को गुलाम बनाने के लिए मंत्र पढ़ रहा था! परंतु उस टक्कर से मंत्र पूरा ना हुआ और महाजीवों की टोली पड़ गई विक्रमसिंह और बांकेलाल के पीछे! अब उनको कौन बचायेगा? भूतों की टोली-556- बांकेलाल और विक्रमसिंह जा पहुंचे प्रसन्न नगर जहां का राजा अप्रसन्नसिंह छोटी-छोटी बातों के लिए मौत की सजा सुना दिया करता था! उसने बांके और विक्रम को भी दे दी मौत की सजा! दूसरी तरफ मौत की सजा पाए लोगों की आत्माओं ने बना ली थी भूतों की टोली जिसमें 101 सदस्य होने में थे बस 2 बाकी! 101 पूरे होते ही उनको मिलनी थी भूत शक्ति! तो क्या बांके और विक्रम भी अब शामिल होने थे भूतों की टोली में?
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HO HO HOLI - Bankelal Comics Free Download

Format: Printed
Issue No: SPCL-2474-H
Language: Hindi
Author: Sushant Panda
Penciler: Sushant Panda
Inker: Sushant Panda
Colorist: Sunil,Jai
Pages: 48
एक बार फिर आई होली, निकल पड़ी हुडदंगों की टोली. बचने के लिए बांके लाल ने बनाया राक्षस को हमजोली! इस बार बांकेलाल ने रची अनोखी योजना| उसके हाथ लगी होलीख़ाक! जो जला कर ख़ाक कर देगी विक्रम सिंह को!
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